श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.14.15 
एवंरूपा मया नारी काचिदन्या महीतले।
न दृष्टपूर्वा सुश्रोणि यादृशी त्वमनिन्दिते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
सुश्रोणि! हे आनन्दिते! मैंने इस पृथ्वी पर तुम्हारे समान सुन्दर मुख वाली कोई स्त्री पहले कभी नहीं देखी॥15॥
 
Sushroni! O Anandite! I have never seen any woman with such a beautiful face as you on this earth before.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)