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mahabharat 4.14.12: (उन्होंने द्रौपदी से पूछा -) 'कल्याणि! तुम कौन हो और किसकी पुत्री हो? अथवा सुमुखी! तुम इस विराटनगर में कहाँ से आई हो? शोभने! ये सब बातें मुझसे सच-सच कहो॥12॥   |   mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.14.12 
का त्वं कस्यासि कल्याणि कुतो वा त्वं वरानने।
प्राप्ता विराटनगरं तत् त्वमाचक्ष्व शोभने॥ १२॥
 
 
अनुवाद
(उन्होंने द्रौपदी से पूछा -) 'कल्याणि! तुम कौन हो और किसकी पुत्री हो? अथवा सुमुखी! तुम इस विराटनगर में कहाँ से आई हो? शोभने! ये सब बातें मुझसे सच-सच कहो॥12॥
 
(He asked Draupadi -) 'Kalyani! Who are you and whose daughter are you? Or Sumukhi! From where have you come to this Viratnagar? Shobhane! Tell me all these things truthfully.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)