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mahabharat 4.14.11: तत्पश्चात् रानी सुदेष्णा की सलाह मानकर कीचक राजकुमारी द्रौपदी के पास आया और उसे सांत्वना देते हुए कहा, 'यह तो ऐसा है जैसे वन में कोई सियार सिंह की पुत्री को फुसला रहा हो।' 11.   |   mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.14.11 
तत: सुदेष्णामनुमन्त्र्य कीचक-
स्तत: समभ्येत्य नराधिपात्मजाम्।
उवाच कृष्णामभिसान्त्वयंस्तदा
मृगेन्द्रकन्यामिव जम्बुको वने॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रानी सुदेष्णा की सलाह मानकर कीचक राजकुमारी द्रौपदी के पास आया और उसे सांत्वना देते हुए कहा, 'यह तो ऐसा है जैसे वन में कोई सियार सिंह की पुत्री को फुसला रहा हो।' 11.
 
Thereafter, taking the advice of Queen Sudeshna, Keechak came to Princess Draupadi and consoled her by saying, 'It is as if a jackal in the forest is luring the daughter of a lion.' 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)