vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 13: भीमसेनके द्वारा जीमूत नामक विश्वविख्यात मल्लका वध
»
श्लोक 42
श्लोक
4.13.42
बीभत्सुरपि गीतेन स्वनृत्येन च पाण्डव:।
विराटं तोषयामास सर्वाश्चान्त:पुरस्त्रिय:॥ ४२॥
अनुवाद
पाण्डुनन्दन अर्जुन ने भी राजा विराट तथा अन्तःपुर की समस्त स्त्रियों को अपने गान और नृत्य से संतुष्ट कर दिया था ॥42॥
Pandunandan Arjun had also satisfied King Virat and all the women of the inner city with his songs and dance. 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×