श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 13: भीमसेनके द्वारा जीमूत नामक विश्वविख्यात मल्लका वध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.13.11 
कृष्णा तु सर्वान् भर्तृृंस्तान् निरीक्षन्ती तपस्विनी।
यथा पुनरविज्ञाता तथा चरति भामिनी॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तपस्वी एवं सुन्दरी द्रौपदी भी अपने सब पतियों का ध्यान रखती हुई इस प्रकार आचरण करती थी कि कोई उसे पहचान न सके ॥11॥
 
The ascetic and beautiful Draupadi too, while taking care of all her husbands, behaved in such a manner that no one would be able to recognize her. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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