(अर्जुन उवाच
वेणीं प्रकुर्यां रुचिरे च कुण्डले
तथा स्रज: प्रावरणानि संहरे।
स्नानं चरेयं विमृजे च दर्पणं
विशेषकेष्वेव च कौशलं मम॥
क्लीबेषु बालेषु जनेषु नर्तने
शिक्षाप्रदानेषु च योग्यता मम।
करोमि वेणीषु च पुष्पपूरणं
न मे स्त्रिय: कर्मणि कौशलाधिका:॥
अनुवाद
अर्जुन बोला, "मैं अच्छी चोटी बना सकता हूँ, सुन्दर झुमके बनाना जानता हूँ, फूलों की माला और चादरें सुन्दर ढंग से बना सकता हूँ, स्नान करा सकता हूँ, दर्पण साफ कर सकता हूँ तथा चंदन आदि से विभिन्न प्रकार की रेखाएँ बनाकर श्रृंगार करने में मेरी विशेष कुशलता है। किन्नरों, बच्चों और साधारण लोगों को नृत्य-संगीत और नाच सिखाने की मेरी अच्छी योग्यता है। मैं स्त्रियों की चोटियों में फूल बुनने का कार्य भी बहुत अच्छे से कर सकता हूँ। इन सब कार्यों में तो स्त्रियाँ भी मुझसे अधिक कुशल नहीं हैं।"
Arjun said, "I can make a good braid, I know how to make beautiful earrings, I can make garlands of flowers and bed sheets in a beautiful manner, I can give bath, I can clean mirrors and I have special skill in the process of makeup by making various types of lines with sandalwood etc. I have good ability to teach dance and music and dance to eunuchs, children and ordinary people. I can also do the work of weaving flowers in the braids of women very well. Even women are not more skilled than me in all these works.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)