श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 11: अर्जुनका राजा विराटसे मिलना और राजाके द्वारा कन्याओंको नृत्य आदिकी शिक्षा देनेके लिये उनको नियुक्त करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.11.9 
इदं तु रूपं मम येन किं तव
प्रकीर्तयित्वा भृशशोकवर्धनम्।
बृहन्नलां मां नरदेव विद्धि
सुतं सुतां वा पितृमातृवर्जिताम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मैंने ऐसा रूप क्यों धारण किया है, यह बताने से क्या लाभ? यह तो दुःख बढ़ाने वाली बात है। हे राजन, कृपया मुझे बृहन्नला समझिए और माता-पिता से विहीन पुत्र या पुत्री समझिए॥9॥
 
What is the use of telling you the reason why I have taken on such a form? That is a matter that will increase grief. O King, please consider me as Brihannala and consider me as a son or daughter deprived of parents.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)