श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 11: अर्जुनका राजा विराटसे मिलना और राजाके द्वारा कन्याओंको नृत्य आदिकी शिक्षा देनेके लिये उनको नियुक्त करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.11.7 
वृद्धो ह्यहं वै परिहारकाम:
सर्वान् मत्स्यांस्तरसा पालयस्व।
नैवंविधा: क्लीबरूपा भवन्ति
कथंचनेति प्रतिभाति मे मन:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मैं बूढ़ा हो गया हूँ; अब मैं राज-काज छोड़ना चाहता हूँ; इसलिए आप शीघ्र ही सम्पूर्ण मत्स्य देश पर शासन करें। आपके समान पुरुष किसी भी प्रकार से नपुंसक नहीं हो सकता। ऐसा मेरा मन करता है।॥7॥
 
I have grown old; now I wish to leave the royal duties; therefore you should rule the entire Matsya country soon. A person of your stature cannot become impotent in any way. This is what my mind feels.'॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)