श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 11: अर्जुनका राजा विराटसे मिलना और राजाके द्वारा कन्याओंको नृत्य आदिकी शिक्षा देनेके लिये उनको नियुक्त करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.11.2 
बाहू च दीर्घान् प्रविकीर्य मूर्धजान्
महाभुजो वारणतुल्यविक्रम:।
गतेन भूमिं प्रतिकम्पयंस्तदा
विराटमासाद्य सभासमीपत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस समय वह महाबाहु पुरुष अपने लंबे बालों को खोलकर उन्हें हाथों तक फैलाकर हाथी के समान राजसी चाल से चला, मानो प्रत्येक पग से पृथ्वी को हिला रहा हो, और राजसभा में राजा विराट के पास आकर खड़ा हो गया॥2॥
 
At that time, that mighty-armed man, having untied his long locks of hair and spreading them till his hands, walked like an elephant in a majestic gait, as if shaking the earth with every step, and came and stood beside King Virat in the royal court.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)