श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 11: अर्जुनका राजा विराटसे मिलना और राजाके द्वारा कन्याओंको नृत्य आदिकी शिक्षा देनेके लिये उनको नियुक्त करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.11.10 
विराट उवाच
ददामि ते हन्त वरं बृहन्नले
सुतां च मे नर्तय याश्च तादृशी:।
इदं तु ते कर्म समं न मे मतं
समुद्रनेमिं पृथिवीं त्वमर्हसि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
विराट बोले - बृहन्नले! मैं तुम्हें मनोवांछित वर देता हूँ। तुम मेरी पुत्री तथा समवयस्क राजकुमारियों को नृत्य सिखाओ। किन्तु मुझे यह कार्य तुम्हारे लिए उपयुक्त नहीं लगता। तुम समुद्र से घिरी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी के अधिपति होने के योग्य हो।
 
Virat said - Brihannale! I give you the desired boon. You teach dancing to my daughter and other princesses of similar age. But I do not find this task suitable for you. You are worthy of being the ruler of the entire earth surrounded by the ocean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)