श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 10: सहदेवका राजा विराटके साथ वार्तालाप और गौओंकी देखभालके लिये उनकी नियुक्ति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.10.15 
विराट उवाच
शतं सहस्राणि समाहितानि
सवर्णवर्णस्य विमिश्रितान् गुणै:।
पशून् सपालान् भवते ददाम्यहं
त्वदाश्रया मे पशवो भवन्त्विह॥ १५॥
 
 
अनुवाद
विराट बोले- तन्तिपाल! मैंने एक लाख पशु एकत्रित किए हैं। उनमें से कुछ एक ही रंग के हैं और कुछ मिश्रित रंग के। वे सभी भिन्न-भिन्न गुणों से युक्त हैं। मैं आज से उन पशुओं और गोपालकों को तुम्हें सौंपता हूँ। मेरे पशु अब से तुम्हारे अधीन रहेंगे॥ 15॥
 
Virat said— Tantipal! I have collected one lakh animals. Some of them are of the same colour and some are of mixed colour. They are all combined with different qualities. I hand over those animals and cattle keepers to you from today. My animals will be under your control from now on.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)