श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 10: सहदेवका राजा विराटके साथ वार्तालाप और गौओंकी देखभालके लिये उनकी नियुक्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.10.1 
वैशम्पायन उवाच
सहदेवोऽपि गोपानां कृत्वा वेषमनुत्तमम्।
भाषां चैषां समास्थाय विराटमुपयादथ॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: जनमेजय! तत्पश्चात सहदेव भी ग्वालों का वेश धारण करके राजा विराट के पास उनकी भाषा में बोलने लगे।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! Thereafter Sahadeva also dressed up as cowherds and went to King Virata speaking in their language.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)