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श्लोक 4.1.9  |
स साधु कौन्तेय इतो वासमर्जुन रोचय।
संवत्सरमिमं यत्र वसेमाविदिता: परै:॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| हे कुन्तीपुत्र अर्जुन! तुम अपनी रुचि के अनुसार कोई अच्छा निवास स्थान चुन लो, जहाँ हम लोग यहाँ से चले जाने के बाद एक वर्ष तक इस प्रकार रह सकें कि हमारे शत्रु हमें न पा सकें।॥9॥ |
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| Kunti's son Arjun! You should choose a good place of residence according to your liking, where after leaving here we can stay for one year in such a way that our enemies cannot find us.'॥ 9॥ |
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