श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 1: विराटनगरमें अज्ञातवास करनेके लिये पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा युधिष्ठिरके द्वारा अपने भावी कार्यक्रमका दिग्दर्शन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.1.8 
द्वादशेमानि वर्षाणि राज्यविप्रोषिता वयम्।
त्रयोदशोऽयं सम्प्राप्त: कृच्छ्रात् परमदुर्वस:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
आज बारह वर्ष बीत गए, हम अपने राज्य से निकलकर वन में रह रहे हैं। अब यह तेरहवाँ वर्ष आरम्भ हो गया है। इसमें हमें अत्यन्त गोपनीयता से, बड़े कष्टों और कष्टों का सामना करते हुए रहना होगा॥8॥
 
‘Today twelve years have passed, we have come out of our kingdom and are living in the forest. Now this thirteenth year has begun. In this we will have to live in utmost secrecy, facing great difficulties and hardships.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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