श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 1: विराटनगरमें अज्ञातवास करनेके लिये पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा युधिष्ठिरके द्वारा अपने भावी कार्यक्रमका दिग्दर्शन  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  4.1.6-7 
कथयित्वा तु तत् सर्वं ब्राह्मणेभ्यो युधिष्ठिर:।
अरणीसहितं तस्मै ब्राह्मणाय न्यवेदयत्॥ ६॥
ततो युधिष्ठिरो राजा धर्मपुत्रो महामना:।
संनिवर्त्यानुजान् सर्वानिति होवाच भारत॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भरत! जब युधिष्ठिर ने ब्राह्मणों से सब बातें कहकर अरणी सहित मथनी की लकड़ी पूर्वोक्त ब्राह्मण देवता को सौंप दी, तब महामनस्वी धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अपने सब भाइयों को बुलाकर इस प्रकार कहा -
 
Bharat! After telling everything to the Brahmins, when Yudhishthira handed over the churning wood along with the Arani to the aforementioned Brahmin god, then the great-minded King Yudhishthira, the son of Dharma, called together all his brothers and said thus -
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas