श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 1: विराटनगरमें अज्ञातवास करनेके लिये पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा युधिष्ठिरके द्वारा अपने भावी कार्यक्रमका दिग्दर्शन  »  श्लोक 28h
 
 
श्लोक  4.1.28h 
इत्येतद् वो मयाऽऽख्यातं विहरिष्याम्यहं यथा।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने तुम्हें बताया है कि मैं विराटनगर में कैसे रहूँगा।
 
In this way I have told you how I will stay in Viratnagar. 27 1/2.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas