श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 1: विराटनगरमें अज्ञातवास करनेके लिये पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा युधिष्ठिरके द्वारा अपने भावी कार्यक्रमका दिग्दर्शन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.1.23 
युधिष्ठिर उवाच
शृणुध्वं यत् करिष्यामि कर्म वै कुरुनन्दना:।
विराटमनुसम्प्राप्य राजानं पुरुषर्षभा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे मनुष्यश्रेष्ठ कुरुणन्द! मैं राजा विराट के यहाँ जाकर जो कार्य करूँगा, वह तुमसे कहूँगा; सुनो॥23॥
 
Yudhishthir said – O best human being, Kurunanda! I will tell you the work I will do when I go to King Virat's place; Listen. 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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