न दु:खमुचितं किञ्चिद् राजन् वेद यथा जन:।
स इमामापदं प्राप्य कथं घोरां तरिष्यसि॥ २२॥
अनुवाद
राजा! यह उचित नहीं है कि आप साधारण मनुष्यों के समान किसी प्रकार का दुःख भोगें; अतः इस घोर संकट में पड़कर आप उसका निवारण कैसे कर सकेंगे?॥ 22॥
King! It is not right that you should experience any kind of pain like ordinary people; so having fallen into this grave difficulty, how will you overcome it?॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)