श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 1: विराटनगरमें अज्ञातवास करनेके लिये पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा युधिष्ठिरके द्वारा अपने भावी कार्यक्रमका दिग्दर्शन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.1.20 
अर्जुन उवाच
नरदेव कथं तस्य राष्ट्रे कर्म करिष्यसि।
विराटनगरे साधो रंस्यसे केन कर्मणा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने पूछा- हे मनुष्यों के स्वामी! आप उनके राष्ट्र में किस प्रकार कार्य करेंगे? महात्मा! विराटनगर में कौन-सा कार्य आपको सुख देगा?॥ 20॥
 
Arjun asked— O Lord of men! How will you work in their nation? Mahatma! What work in Viratnagar will make you happy?॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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