श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 1: विराटनगरमें अज्ञातवास करनेके लिये पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा युधिष्ठिरके द्वारा अपने भावी कार्यक्रमका दिग्दर्शन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.1.19 
यानि यानि च कर्माणि तस्य वक्ष्यामहे वयम्।
आसाद्य मत्स्यं तत् कर्म प्रब्रूत कुरुनन्दना:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
परन्तु हे कुरुपुत्रों! तुम मुझे बताओ कि मत्स्यराज के पास पहुँचकर हम लोग कौन-कौन से कार्य कर सकेंगे?॥19॥
 
But, O sons of Kuru! You tell me what all tasks will we be able to undertake after reaching Matsyaraj?॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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