श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 1: विराटनगरमें अज्ञातवास करनेके लिये पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा युधिष्ठिरके द्वारा अपने भावी कार्यक्रमका दिग्दर्शन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.1.18 
विराटनगरे तात संवत्सरमिमं वयम्।
कुर्वन्तस्तस्य कर्माणि विहरिष्याम भारत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इसलिए भाई अर्जुन! इस वर्ष हमें राजा विराट की नगरी में रहना चाहिए और उनके उद्देश्य की पूर्ति करते हुए वहाँ भ्रमण करना चाहिए॥18॥
 
Brother Arjun, therefore this year we should stay in the city of King Virata and travel around there while serving his purpose.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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