श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 1: विराटनगरमें अज्ञातवास करनेके लिये पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा युधिष्ठिरके द्वारा अपने भावी कार्यक्रमका दिग्दर्शन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.1.16 
अवश्यं त्वेव वासार्थं रमणीयं शिवं सुखम्।
सम्मन्त्र्य सहितै: सर्वैर्वस्तव्यमकुतोभयै:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
फिर भी, हम सबको आपस में परामर्श करके एक बहुत ही सुन्दर, शुभ और सुखद स्थान चुनकर रहना चाहिए, जहाँ हम निर्भय होकर रह सकें॥16॥
 
However, we must all consult amongst ourselves and choose a very beautiful, auspicious and pleasant place to live, where we can live without any fear.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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