श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 1: विराटनगरमें अज्ञातवास करनेके लिये पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा युधिष्ठिरके द्वारा अपने भावी कार्यक्रमका दिग्दर्शन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.1.15 
युधिष्ठिर उवाच
श्रुतमेतन्महाबाहो यथा स भगवान् प्रभु:।
अब्रवीत् सर्वभूतेशस्तत् तथा न तदन्यथा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - "हे महाबली! मैंने आपके वचन ध्यानपूर्वक सुने हैं। समस्त प्राणियों के स्वामी और पराक्रमी भगवान धर्म ने हमारे लिए जो भी आदेश दिया है, वह ठीक वैसा ही होगा। उसके विपरीत कुछ भी नहीं होगा।" ॥15॥
 
Yudhishthira said, "O mighty one! I have listened to your words attentively. Whatever the Lord Dharma, the lord of all beings and the powerful one, has ordered for us, will happen exactly like that. Nothing will happen contrary to that." ॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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