श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.99.8 
वातापे निष्क्रमस्वेति पुन: पुनरुवाच ह।
तं प्रहस्याब्रवीद् राजन्नगस्त्यो मुनिसत्तम:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इल्वल ने बार-बार कहा, "हे वातापे! बाहर निकलो, बाहर निकलो।" राजन्! तब महर्षि अगस्त्य ने मुस्कुराकर उससे कहा -॥8॥
 
Ilval repeatedly said, "O Vaatape! Get out, get out." King! Then the great sage Agastya smiled and said to him -॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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