श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  3.99.71 
एतदीदृशकं तात रामेणाक्लिष्टकर्मणा।
प्राप्तमासीन्महाराज विष्णुमासाद्य वै पुरा॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
हे राजा युधिष्ठिर! पूर्वकाल में अनायास ही महान् कर्म करने वाले परशुराम भगवान विष्णु के अवतार श्री राम से युद्ध करके इस अवस्था को प्राप्त हुए थे।
 
O dear King Yudhishthira! In the past, Parasurama, who had done great deeds without any effort, had attained this condition after fighting with Lord Rama, who was the incarnation of Lord Vishnu.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां जामदग्न्यतेजोहानिकथने एकोनशततमोऽध्याय:॥ ९९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें परशुरामके तेजकी हानिविषयक निन्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल ७४ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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