श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  3.99.69 
दीप्तोदं नाम तत् तीर्थं यत्र ते प्रपितामह:।
भृगुर्देवयुगे राम तप्तवानुत्तमं तप:॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
हे राम! वह दीप्तोदक नामक तीर्थ है, जहाँ देवयुग में आपके परदादा भृगुन ने महान तप किया था॥69॥
 
Ram! That is a pilgrimage place named Deeptodak, where your great grandfather Bhrigun had performed great penance in Devyuga. 69॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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