श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  3.99.68 
गच्छ पुत्र नदीं पुण्यां वधूसरकृताह्वयाम्।
तत्रोपस्पृश्य तीर्थेषु पुनर्वपुरवाप्स्यसि॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
बेटा! अब तुम वधूसर नामक पवित्र नदी के तट पर जाओ। वहाँ के तीर्थों में स्नान करके तुम पुनः पहले जैसा तेजस्वी शरीर प्राप्त कर लोगे।
 
Son! Now you go to the banks of the holy river named Vadhusar. After taking a bath in the holy places there, you will regain your radiant body as before. 68.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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