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mahabharat 3.99.67: पितरों ने कहा - भगवान विष्णु के पास जाकर तुमने जो आचरण किया, वह उचित नहीं था। वे तीनों लोकों में सदैव पूजनीय और आदरणीय हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.99.67 
पितर ऊचु:
न वै सम्यगिदं पुत्र विष्णुमासाद्य वै कृतम्।
स हि पूज्यश्च मान्यश्च त्रिषु लोकेषु सर्वदा॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
पितरों ने कहा - भगवान विष्णु के पास जाकर तुमने जो आचरण किया, वह उचित नहीं था। वे तीनों लोकों में सदैव पूजनीय और आदरणीय हैं।
 
The ancestors said - The way you behaved when you went to Lord Vishnu was not right. He is always worship-worthy and respected in all the three worlds. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)