Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.99.66: तत्पश्चात् एक वर्ष बीत जाने पर परशुराम को दुःखी, गर्व और शक्ति से रहित देखकर उनके पितरों ने कहा -   |   mahabharat अध्याय 3.99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  3.99.66 
तत: संवत्सरेऽतीते हृतौजसमवस्थितम्।
निर्मदं दु:खितं दृष्ट्वा पितरो राममब्रुवन्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् एक वर्ष बीत जाने पर परशुराम को दुःखी, गर्व और शक्ति से रहित देखकर उनके पितरों ने कहा -
 
Thereafter, after one year had passed, seeing Parasurama sad and devoid of pride and energy, his ancestors said -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)