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mahabharat 3.99.63: श्री रामजी की भुजाओं से प्रेरित होकर वह प्रज्वलित बाण परशुरामजी को व्याकुल करके उनका तेज ही छीनकर लौट गया ॥ 63॥   |   mahabharat अध्याय 3.99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  3.99.63 
स रामं विह्वलं कृत्वा तेजश्चाक्षिप्य केवलम्।
आगच्छज्ज्वलितो बाणो रामबाहुप्रचोदित:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी की भुजाओं से प्रेरित होकर वह प्रज्वलित बाण परशुरामजी को व्याकुल करके उनका तेज ही छीनकर लौट गया ॥ 63॥
 
That blazing arrow, inspired by the arms of Sri Rama, troubled Parasurama and returned after snatching away only his brilliance. ॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)