Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.99.55: 'निश्चय ही आपने अपने पितामह ऋचीक के प्रभाव से क्षत्रियों को परास्त करके विशेष पराक्रम प्राप्त किया है; इसीलिए आप मुझ पर आरोप लगा रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.99.55 
त्वया ह्यधिगतं तेज: क्षत्रियेभ्यो विशेषत:।
पितामहप्रसादेन तेन मां क्षिपसि ध्रुवम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
'निश्चय ही आपने अपने पितामह ऋचीक के प्रभाव से क्षत्रियों को परास्त करके विशेष पराक्रम प्राप्त किया है; इसीलिए आप मुझ पर आरोप लगा रहे हैं।
 
'You have surely gained special prowess by defeating the Kshatriyas under the influence of your grandfather Richik; that is why you are accusing me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)