Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.99.48: ‘मैं क्षत्रिय धर्म का पालन करने में समस्त द्विज जातियों में सबसे नीच नहीं हूँ। विशेषकर इक्ष्वाकु वंश के क्षत्रिय अपने शारीरिक बल का घमंड नहीं करते।’॥48॥ | mahabharat अध्याय 3.99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाहमप्यधमो धर्मे क्षत्रियाणां द्विजातिषु।
इक्ष्वाकूणां विशेषेण बाहुवीर्ये न कत्थनम्॥ ४८॥
अनुवाद
‘मैं क्षत्रिय धर्म का पालन करने में समस्त द्विज जातियों में सबसे नीच नहीं हूँ। विशेषकर इक्ष्वाकु वंश के क्षत्रिय अपने शारीरिक बल का घमंड नहीं करते।’॥48॥
‘I am also not the lowest among all the Dwija castes in following the Kshatriya Dharma. Especially the Kshatriyas of the Ikshvaku clan do not boast of their physical strength.’॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥