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श्लोक 3.99.47  |
| इत्युक्तस्त्वाह भगवंस्त्वं नाधिक्षेप्तुमर्हसि॥ ४७॥ |
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| अनुवाद |
| उनके ऐसा कहने पर श्री रामचन्द्रजी बोले - 'प्रभो! आपको इस प्रकार आपत्ति नहीं करनी चाहिए। |
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| On his saying this, Shri Ramchandraji said – 'Lord! You should not object like this. |
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