श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.99.39 
अपृच्छच्चैव राजेन्द्र लोमशं पाण्डुनन्दन:।
भगवन् किमर्थं रामस्य हृतमासीद् वपु: प्रभो।
कथं प्रत्याहृतं चैव एतदाचक्ष्व पृच्छत:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! उस समय पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर ने महर्षि लोमश से पूछा - 'भगवन! परशुराम का तेज क्यों हरण हुआ और उन्होंने उसे कैसे पुनः प्राप्त किया? मैं यह जानना चाहता हूँ। कृपया इस घटना का वर्णन कीजिए।'
 
Rajendra! At that time Yudhishthira, the son of Pandu, asked Maharishi Lomasha - 'Lord! Why was Parashurama's glory abducted and how did he get it back? I want to know this. Kindly describe this incident.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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