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mahabharat 3.99.31: इसके निकट भगवान् गन्धर्व द्वारा सेवित वही पुण्यशाली भागीरथी है, जो वायु की प्रेरणा से आकाश में लहराती हुई श्वेत ध्वजा के समान शोभा पा रही है॥31॥   |   mahabharat अध्याय 3.99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.99.31 
एषा भागीरथी पुण्या देवगन्धर्वसेविता।
वातेरिता पताकेव विराजति नभस्तले॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इसके निकट भगवान् गन्धर्व द्वारा सेवित वही पुण्यशाली भागीरथी है, जो वायु की प्रेरणा से आकाश में लहराती हुई श्वेत ध्वजा के समान शोभा पा रही है॥31॥
 
Near this is the same virtuous Bhagirathi served by God Gandharva, who is becoming beautiful like a white flag fluttering in the sky with the inspiration of the wind. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)