vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति
»
श्लोक 30
श्लोक
3.99.30
प्राह्लादिरेवं वातापिरगस्त्येनोपशामित:।
तस्यायमाश्रमो राजन् रमणीयैर्गुणैर्युत:॥ ३०॥
अनुवाद
प्रह्लाद के कुल में वातापि उत्पन्न हुए थे, जिन्हें अगस्त्य ने इस प्रकार शांत किया था। राजन! यह उनका रमणीय गुणों से परिपूर्ण आश्रम है। 30॥
Vatapi was born in Prahlad's clan, which Agastya pacified in this way. Rajan! This is his ashram full of delightful qualities. 30॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd