श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.99.29 
लेभिरे पितरश्चास्य लोकान् राजन् यथेप्सितान्।
तत ऊर्ध्वमयं ख्यातस्त्वगस्त्यस्याश्रमो भुवि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् उनके पूर्वजों को इच्छित लोक की प्राप्ति हुई। तत्पश्चात् यह स्थान इस पृथ्वी पर अगस्त्य आश्रम के नाम से प्रसिद्ध हुआ। 29॥
 
Rajan! Thereafter his ancestors attained their desired world. After that this place became famous on this earth by the name of Agastya Ashram. 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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