श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.99.26 
साङ्गोपनिषदान् वेदाञ्जपन्निव महातपा:।
तस्य पुत्रोऽभवदृषे: स तेजस्वी महाद्विज:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
महर्षिक का वह महान तपस्वी और तेजस्वी पुत्र जन्म से ही अंग और उपनिषदों सहित सम्पूर्ण वेदों का अध्ययन करता हुआ प्रतीत होता था। दृढस्यु ब्राह्मणों में श्रेष्ठ माना जाता था॥26॥
 
That great ascetic and brilliant son of Maharshika seemed to be studying the entire Vedas including the Angas and Upanishads from the time of his birth. Dridhasyu was considered to be the greatest among the Brahmins.॥26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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