लोमश उवाच
स तथेति प्रतिज्ञाय तया समभवन्मुनि:।
समये समशीलिन्या श्रद्धावाञ्छ्रद्दधानया॥ २३॥
अनुवाद
लोमशजी कहते हैं- राजन! तब ‘तथास्तु’ कहकर भक्त महात्मा अगस्त्य उचित समय पर अपनी भक्त पत्नी लोपामुद्रा से मिले, जो समान आचरण और आचरण वाली थी॥23॥
Lomashji says- Rajan! Then saying 'Tathaastu', devotee Mahatma Agastya met at the right time with his devotee wife Lopamudra who was of similar conduct and conduct. 23॥