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लोपामुद्रोवाच
सहस्रसम्मित: पुत्र एकोऽप्यस्तु तपोधन।
एको हि बहुभि: श्रेयान् विद्वान् साधुरसाधुभि:॥ २२॥
अनुवाद
लोपामुद्रा बोली - हे तपस्वी! मुझे एक ही ऐसा गुणवान पुत्र मिले जो हजारों पुत्रों के समान हो; क्योंकि एक ही विद्वान् और गुणवान पुत्र अनेक दुष्ट पुत्रों से श्रेष्ठ माना जाता है।
Lopamudra said - O ascetic! May I get just one virtuous son who is equal to thousands of others; because a single learned and virtuous son is considered better than many wicked sons.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥