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mahabharat 3.99.20: अगस्त्य बोले, "हे सुंदरी! मैं तुम्हारे उत्तम आचरण से अत्यंत संतुष्ट हूँ। मैं पुत्र के विषय में तुम्हारे समक्ष एक सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूँ, सुनो।"   |   mahabharat अध्याय 3.99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.99.20 
अगस्त्य उवाच
तुष्टोऽहमस्मि कल्याणि तव वृत्तेन शोभने।
विचारणामपत्ये तु तव वक्ष्यामि तां शृणु॥ २०॥
 
 
अनुवाद
अगस्त्य बोले, "हे सुंदरी! मैं तुम्हारे उत्तम आचरण से अत्यंत संतुष्ट हूँ। मैं पुत्र के विषय में तुम्हारे समक्ष एक सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूँ, सुनो।"
 
Agastya said, 'O beautiful Kalyani! I am very satisfied with your good behaviour. I am presenting a suggestion to you regarding the son, listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)