vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति
»
श्लोक 20
श्लोक
3.99.20
अगस्त्य उवाच
तुष्टोऽहमस्मि कल्याणि तव वृत्तेन शोभने।
विचारणामपत्ये तु तव वक्ष्यामि तां शृणु॥ २०॥
अनुवाद
अगस्त्य बोले, "हे सुंदरी! मैं तुम्हारे उत्तम आचरण से अत्यंत संतुष्ट हूँ। मैं पुत्र के विषय में तुम्हारे समक्ष एक सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूँ, सुनो।"
Agastya said, 'O beautiful Kalyani! I am very satisfied with your good behaviour. I am presenting a suggestion to you regarding the son, listen.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas