Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.99.17-18: उस रथ में वीरव और सुरव नाम के दो घोड़े जुते हुए थे। वे राजाओं और अगस्त्य मुनि को धन सहित पलक झपकते ही अगस्त्य आश्रम ले गए। उस समय इल्वल असुर ने अगस्त्य मुनि के पीछे जाकर उन्हें मारना चाहा, किन्तु अत्यन्त बलशाली अगस्त्य मुनि ने गर्जना करके उस महादैत्य इल्वल को नष्ट कर दिया। तत्पश्चात् वे घोड़े वायु के समान वेग से उन सबको मुनि के आश्रम ले गए। हे भरतपुत्र! तत्पश्चात् अगस्त्य मुनि की अनुमति लेकर वे राजा अपनी-अपनी राजधानियों को चले गए और मुनि ने लोपामुद्रा की समस्त इच्छाएँ पूर्ण कीं। 17-18। | mahabharat अध्याय 3.99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस रथ में वीरव और सुरव नाम के दो घोड़े जुते हुए थे। वे राजाओं और अगस्त्य मुनि को धन सहित पलक झपकते ही अगस्त्य आश्रम ले गए। उस समय इल्वल असुर ने अगस्त्य मुनि के पीछे जाकर उन्हें मारना चाहा, किन्तु अत्यन्त बलशाली अगस्त्य मुनि ने गर्जना करके उस महादैत्य इल्वल को नष्ट कर दिया। तत्पश्चात् वे घोड़े वायु के समान वेग से उन सबको मुनि के आश्रम ले गए। हे भरतपुत्र! तत्पश्चात् अगस्त्य मुनि की अनुमति लेकर वे राजा अपनी-अपनी राजधानियों को चले गए और मुनि ने लोपामुद्रा की समस्त इच्छाएँ पूर्ण कीं। 17-18।
Two horses named Virav and Surav were harnessed to that chariot. They took the kings and sage Agastya along with their wealth to Agastya Ashram in the blink of an eye. At that time, Ilval Asura wanted to go after sage Agastya and kill him, but the very powerful sage Agastya destroyed that great demon Ilval with a roar. Thereafter, those horses as fast as the wind took them all to the sage's Ashram. O son of Bharat! Then, taking Agastya's permission, those kings went to their respective capitals and the sage fulfilled all the wishes of Lopamudra. 17-18.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥