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mahabharat 3.99.16: लोमश कहते हैं - कुंतीपुत्र युधिष्ठिर ने जब जाँच की तो रथ सोने का निकला। तब अपने भाई की मृत्यु से दुःखी राक्षस ने ऋषि को बहुत सारा धन दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.99.16 
लोमश उवाच
जिज्ञास्यमान: स रथ: कौन्तेयासीद्धिरण्मय:।
तत: प्रव्यथितो दैत्यो ददावभ्यधिकं वसु॥ १६॥
 
 
अनुवाद
लोमश कहते हैं - कुंतीपुत्र युधिष्ठिर ने जब जाँच की तो रथ सोने का निकला। तब अपने भाई की मृत्यु से दुःखी राक्षस ने ऋषि को बहुत सारा धन दिया।
 
Lomasha says - Yudhishthira, son of Kunti, when investigated, the chariot turned out to be made of gold. Then the demon, distressed by the death of his brother, gave a lot of wealth to the sage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)