श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.99.14 
अगस्त्य उवाच
गवां दशसहस्राणि राज्ञामेकैकशोऽसुर।
तावदेव सुवर्णस्य दित्सितं ते महासुर॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अगस्त्य ने कहा, 'हे महाबली! आप इन राजाओं को दस-दस हजार गायें तथा उतनी ही स्वर्ण मुद्राएँ देना चाहते हैं।' 14.
 
Agastya said, 'O great demon! You wish to give ten thousand cows and the same number of gold coins to each of these kings.' 14.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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