श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.99.13 
ततोऽभिवाद्य तमृषिमिल्वलो वाक्यमब्रवीत्।
दित्सितं यदि वेत्सि त्वं ततो दास्यामि ते वसु॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब इल्वल ने मुनि को प्रणाम करके कहा - "मैं आपको कितना धन देना चाहता हूँ? यदि आप यह जान लें, तो मैं आपको धन दे दूँगा।" ॥13॥
 
Then Ilval bowed to the sage and said, "How much money do I want to give you? If you know this, I will give you the money." ॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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