श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.99.11 
प्रत्युवाच ततोऽगस्त्य: प्रहसन्निल्वलं तदा।
ईशं ह्यसुर विद्मस्त्वां वयं सर्वे धनेश्वरम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तब महर्षि अगस्त्य ने मुस्कुराते हुए इल्वल से कहा - 'हे दैत्य! हम सभी तुम्हें एक शक्तिशाली शासक और धन-संपत्ति का स्वामी मानते हैं।
 
Then Maharishi Agastya smilingly said to Ilvala - 'O demon! We all consider you a powerful ruler and a possessor of wealth.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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