श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 99: अगस्त्यजीका इल्वलके यहाँ धनके लिये जाना, वातापि तथा इल्वलका वध,लोपामुद्राको पुत्रकी प्राप्ति तथा श्रीरामके द्वारा हरे हुए तेजकी परशुरामजीको तीर्थस्नानद्वारा पुन: प्राप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.99.1 
लोमश उवाच
इल्वलस्तान् विदित्वा तु महर्षिसहितान्नृपान्।
उपस्थितान् सहामात्यो विषयान्ते ह्यपूजयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
लोमश कहते हैं - हे राजन! उन राजाओं को मुनि सहित आते हुए जानकर इल्वल अपने मंत्रियों के साथ अपने राज्य की सीमा पर आया और उन सबका पूजन किया।
 
Lomasha says - O King! Knowing that those kings along with the sage were coming, Ilval along with his ministers arrived at the border of his kingdom and worshipped them all.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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