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mahabharat 3.98.6: ब्रह्मर्षि अगस्त्य सम बुद्धि वाले थे। आय-व्यय को देखकर उन्होंने सोचा कि इसमें से थोड़ा-सा धन लेने से अन्य प्राणियों को बड़ा कष्ट हो सकता है। ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.98: धन प्राप्त करनेके लिये अगस्त्यका श्रुतर्वा, ब्रध्नश्व और त्रसदस्यु आदिके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 98: धन प्राप्त करनेके लिये अगस्त्यका श्रुतर्वा, ब्रध्नश्व और त्रसदस्यु आदिके पास जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.98.6 
तत आयव्ययौ दृष्ट्वा समौ सममतिर्द्विज:।
सर्वथा प्राणिनां पीडामुपादानादमन्यत॥ ६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षि अगस्त्य सम बुद्धि वाले थे। आय-व्यय को देखकर उन्होंने सोचा कि इसमें से थोड़ा-सा धन लेने से अन्य प्राणियों को बड़ा कष्ट हो सकता है। ॥6॥
 
Brahmarishi Agastya had an equal mind. Looking at the income and expenditure, he thought that taking even a little money from this can cause great suffering to other beings. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)