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mahabharat 3.98.5: लोमशजी कहते हैं - युधिष्ठिर ! तब राजा श्रुतर्वणे ने अपनी आय-व्यय का पूरा विवरण मुनि के समक्ष प्रस्तुत किया और कहा - 'मुनिवर! इस धन में से जो उचित समझो, ले लो।' ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.98: धन प्राप्त करनेके लिये अगस्त्यका श्रुतर्वा, ब्रध्नश्व और त्रसदस्यु आदिके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 98: धन प्राप्त करनेके लिये अगस्त्यका श्रुतर्वा, ब्रध्नश्व और त्रसदस्यु आदिके पास जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.98.5 
लोमश उवाच
तत आयव्ययौ पूर्णौ तस्मै राजा न्यवेदयत्।
अतो विद्वन्नुपादत्स्व यदत्र वसु मन्यसे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
लोमशजी कहते हैं - युधिष्ठिर ! तब राजा श्रुतर्वणे ने अपनी आय-व्यय का पूरा विवरण मुनि के समक्ष प्रस्तुत किया और कहा - 'मुनिवर! इस धन में से जो उचित समझो, ले लो।' ॥5॥
 
Lomashji says - Yudhishthir! Then King Shrutarvane presented the complete details of his income and expenditure before the sage and said - 'Wise sage! Take whatever you think is right from this wealth.' ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)