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mahabharat 3.98.4: तब अगस्त्यजी बोले, "हे पृथ्वी के स्वामी! आपको यह जान लेना चाहिए कि मैं आपसे धन मांगने आया हूँ। अन्य प्राणियों को कष्ट न देते हुए, आप मुझे अपना जितना धन दे सकें, दे दीजिए।"॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.98: धन प्राप्त करनेके लिये अगस्त्यका श्रुतर्वा, ब्रध्नश्व और त्रसदस्यु आदिके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 98: धन प्राप्त करनेके लिये अगस्त्यका श्रुतर्वा, ब्रध्नश्व और त्रसदस्यु आदिके पास जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.98.4 
अगस्त्य उवाच
वित्तार्थिनमनुप्राप्तं विद्धि मां पृथिवीपते।
यथाशक्त्यविहिंस्यान्यान् संविभागं प्रयच्छ मे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब अगस्त्यजी बोले, "हे पृथ्वी के स्वामी! आपको यह जान लेना चाहिए कि मैं आपसे धन मांगने आया हूँ। अन्य प्राणियों को कष्ट न देते हुए, आप मुझे अपना जितना धन दे सकें, दे दीजिए।"॥4॥
 
Then Agastya said, "O Lord of the Earth! You should know that I have come to you to ask for money. Without causing trouble to other creatures, give me as much of your wealth as you can. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)